Wednesday, January 26, 2022

Flag Hoisting and Flag Unfurling

 ध्वजारोहण या ध्वज फहराना 

Flag Hoisting and Flag Unfurling



 साथियों नमस्कार ,

आप सबको 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस ) की हार्दिक बधाई। इस दिन की महत्ता और इतिहास के बारे में आप लोग भली भांति से परिचित होंगे सो इसके बारे में बात ना करके मुख्य बात में आते हैं। 

15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस Independence Day) पर क्या किया जाता है ? ध्वजारोहण या ध्वज फहराना 

इसी प्रकार 26 जनवरी (गणतंत्रता दिवस Republic Day) को क्या किया जाता है ? ध्वजारोहण या ध्वज फहराना 

बहुत सारे साथियों को ये सब पता होगा मगर कुछेक साथियों को जानकरी नहीं होगी तो मैं थोड़ा सा प्रयास कर रहा हूँ, गलती पर आप लोगों के मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी ज़रूर सहयोग करें। तो पुनः मुद्दे की बात, सबसे पहले तो यह जान लेते हैं कि - 

ध्वजारोहण और ध्वजा फहराने में अंतर क्या है ?

ध्वजारोहण(Flag Hoisting)

जब तिरंगे झंडे (राष्ट्रीय ध्वज National Flag) को रस्सी के सहारे धीरे धीरे ऊपर की ओर ले जाया जाता है और स्तम्भ के शीर्ष पर पंहुचा कर स्थिर करके रस्सी को बांध दिया जाता है तो यह विधि ध्वजारोहण या Flag Hoisting कहा जाता है। आसान भाषा में कहें तो ध्वज को स्तम्भ (Pole) में ऊपर की ओर खींचकर फहराया जाना।  

ध्वजा फहराना (Flag Unfurling)
जब हमारे तिरंगे झंडे (राष्ट्रीय ध्वज National Flag) को पहले ऊपर बांध दिया जाता है और बाद में रस्सी की सहायता से नीचे से ही उसकी गांठें खोलकर स्तम्भ (Pole) के शीर्ष  में फहरा दिया जाता है तो इसे ध्वज फहराना या झंडा फहरान (Flag Unfurling) कहा जाता है। अर्थात ध्वज फहराने की प्रक्रिया में झण्डे को पूर्व में ही स्तम्भ के शीर्ष पर बांध दिया जाता है और रस्सियों से लपेट कर पोटली के सामान बना दिया जाता है जिसे रस्सी को ढील देकर या खिंच कर नीचे से खोला जा सके, तत्पश्चात झण्डा वंदन करके नीचे से ही झण्डा फहराया जाता है। 

अब आगे बात करते हैं कि - 
15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस Independence Day) पर क्या किया जाता है ? ध्वजारोहण या ध्वज फहराना 

तो साथियों अब तो आप समझ गए होंगे की 15 अगस्त को क्या किया जाता है ? नहीं समझे तो चलो चर्चा करते हैं की जब अंग्रेज़ शासन था तब हमारे देश के प्रत्येक प्रमुख संस्थाओं विशेषकर सरकारी संस्थाओं में अंग्रेजी हुकूमत का प्रतिक अंग्रेजी झण्डा (England Flag) फहराया जाता था, और जब देश आज़ाद हुआ तब प्रत्येक संस्थाओं में विधिवत अंग्रेजी झण्डे को ससम्मान उतारा गया और तिरंगे झण्डे (भारतीय शासन या आज़ादी के प्रतिक) को फहरते हुए ऊपर चढ़ाया गया। तब से प्रत्येक 15 अगस्त को ध्वजारोहण की परम्परा प्रारम्भ हुई जो की निरंतर चली आ रही है।  

यह ध्वजारोहण देश के सर्वोच्च जनप्रतिनिधि के द्वारा लाल किले (दिल्ली) में फहराया जाता है जबकि अन्य संस्थाओं में संस्था प्रमुख / गणमान्य नागरिक /आम नागरिकों या संस्था के अनुरूप मनोनीत प्रमुख व्यक्तियों द्वारा फहराया जाता है।

26 जनवरी (गणतंत्रता दिवस Republic Day) को क्या किया जाता है ? ध्वजारोहण या ध्वज फहराना 

जैसा की ऊपर में तथ्य रखा गया उसके अनुसार आगे बढ़ते हुए हम देखेंगे की देश के आज़ाद होने के बाद हमारे देश का अपना कानून बनाया गया जिसे संविधान कहा जाता है। यह संविधान वर्षों (2 वर्ष 11 माह 18 दिन) के मेहनत और बहुत सारे विशेषज्ञों की निगरानी में बहुत सारे तर्क वितर्क तथ्यों के पड़ताल के पश्चात्  26 नवम्बर 1949 को मूर्तरूप ले पाया था। मगर गणतंत्र के रूप में मनाया गया 26 जनवरी 1950  को क्योकि हमारे देश के तात्कालीन नेताओं ने आज़ादी के पूर्व ही 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया था जिसकी स्मृति में गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया गया था तब से ही आज दिवस तक 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस या Republic Day के रूप मनाते आ रहे हैं। और 26 नवम्बर को संविधान दिवस दिवस के रूप में मनाया जाता है। 
तो इस दिन संवैधानिक प्रमुख माननीय राष्ट्रपति महोदय दिल्ली के राजपथ पर झण्डा फहराते हैं तथा अन्य संस्थाओं में संस्था प्रमुख / गणमान्य नागरिक /आम नागरिकों या संस्था के अनुरूप मनोनीत प्रमुख व्यक्तियों द्वारा फहराया जाता है।

तो साथियों जानकारी कैसी लगी ?
बताइये ज़रूर और कोई सुझाव हो तो कमेंट कीजिये। ....... सबका शुभ हो। धन्यवाद 













Monday, January 24, 2022

आपकी हकीकत आपको पता है - You Know Your Reality

 आपकी हकीकत आपको पता है 

(You Know Your Reality)

साथियों नमस्कार 

शीर्षक से आपको लगा होगा की ये साधारण सा वाक्य है मगर ऐसा नहीं है ये वाक्य अपने में एक विस्तृत अर्थ समेटे हुए है। अब आप कहेंगे की क्या विस्तृत है इसमें ये तो सीधा सीधा सा अर्थ बतला रहा है की - भाई जो मैं हूँ वो तो मैं ही जानता हूँ कोई और क्या जानेगा। 

एक चौकीदार गेट पर खड़ा हो कर साहब लोगों को देखता है और सोचता है की इन लोगों का जीवन कितना अच्छा है जो मस्त ठाठ बाट से रहते हैं और अपने  मज़े से जी रहें हैं। उसी समय वहीं साहब जिसके बारे में चौकीदार सोच रहा है, वह भी चौकीदार को देखता और सोचता है की  इनका जीवन कितना अच्छा है ना तो इनको बॉस की फटकार और बेइज़्ज़ती झेलनी  न ही किसी प्रतियोगिता, स्पर्धा का डर बस मज़े से अपना ड्यूटी करना है और महीने में तनख्वाह लेना है ना किसी की चिक चिक ना झिक झिक।

ऐसा वाकया या उदाहरण आपको हर कहीं मिल जायेगा क्योंकि ऐसा होना एकदम आम बात है। सभी अपनी परिस्थिति और ज़रूरतों  मुताबिक सही सोच रहे होते हैं मगर यहीं तो मेरा वाक्य आकर पूछता  है की जब आपको आपकी हकीकत पता है,  और यह भी पता है की जिस स्थिति में आप अभी हो वहां क्यों हो ये आपसे बेहतर कौन जान सकता है फिर दूसरे से तुलना क्यों ?

हम वास्तविकता को दरकिनार करते हुए हमेशा दूसरों से खुद की तुलना करने लग जाते हैं ये सही बात नहीं और ऐसा करके स्वयं को छोटा महसूस कराते हैं कि मेरे पास ये नहीं है वो नहीं है या फिर दूसरों से तुलना कर खुद को घमण्ड से भर लेते हैं की हमारे पास फलां व्यक्ति से ज्यादा समृद्धि या पॉवर या पैसा है। 

आप स्वयं को जानिये और संतुष्ट रहिये बल्कि खुद के हैसियत की तुलना स्वयं के सामर्थ्य से कीजिये की क्या आपने वह सब हासिल किया जो आपको करना चाहिए था या आप किसके लायक थे ? संभवतः इस प्रश्न के 3 उत्तर हो सकते हैं -

1.  यदि इसका उत्तर आता है की मैंने अपने योग्यता से अधिक पा लिया है तो कभी घमण्ड मत कीजिये और उस अदृश्य शक्ति के प्रति श्रद्धा प्रकट कीजिये जिनके कारण यह सब संभव हो सका।  इसके साथ ही अपने से ज्यादा वंचित समुदाय का यथा योग्य सहायता कीजिये।  इससे आपको आत्मीय शांति मिलेगी और जीवन बड़े संतुष्टि से कटेगा और तब यह मतलब ज्यादा यथार्थ होगा की - "आपकी हकीकत आपको पता है "

2. यदि इसका उत्तर आता है की मुझे मेरे अनुरूप प्रत्येक चीज़ मिल चुकी है तो बहुत अच्छी बात है आप अपने मन में अब संतुष्टि का भाव रखे और उस शक्ति के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करें जिसने आपको इस लायक बनाया है। इन सबके पश्चात अपने लिए अब नए लक्ष्य निर्धारित करें और नए तरीके से उसे पूरा करने के लिए कमर कस कर लग जाइये। 

3. यदि इसका उत्तर आता है की मुझे कुछ भी वैसा नहीं मिला जैसा मुझे मिलना चाहिए या मेरा जैसा सामर्थ्य और योग्यता है उस हिसाब से मैंने कुछ भी हासिल नहीं किया है तो तुरंत नींद से जागिये खुद को पहचानिये और हाथ धोकर पीछे पड़ जाइये की आपको क्या हासिल करना है। खुद से खुद की तुलना कीजिये और कितना क्या कम पड़ रहा है उसे पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत कीजिये। फिर इस वाक्य को चरितार्थ कीजिये कि - "आपकी हकीकत आपको पता है "

आशा है कि जो सोच मैंने आपके सामने रखा है वो आपको भी सत्य लगे। लेकिन इसमें सुधार की कोई आवश्यकता लगे तो ज़रूर मार्गदर्शन करें।  धन्यवाद 

Saturday, January 15, 2022

मन को शांत रखने के 20 तरीके man ko shant rakhne ke 20 tarike

 

मन को शांत रखने के 20 तरीके 

मन का विश्राम 

वर्तमान दौर नितांत थकाने वाला है क्योंकि जीवन सिर्फ और सिर्फ दौड़ बनकर रह गया है. सभी कहीं न कहीं पहुंचना चाहते है मगर कहा पहुचना है ये किसी को नहीं पता कारण है कि प्रत्येक इन्सान का लक्ष्य निरंतर परिवर्तनशील होता है. इसमें किसी का दोष नहीं है ये तो मानव जीवन की प्रवृत्ति है.

इस आपाधापी और पालकों के ज्यादा उम्मीदों के बोझ का सामना किशोर वर्ग को ज्यादा उठाना पड़ता है . अपने जीवन और सपनों के बीच पालकों के सपनों को जीने की जिम्मेदारी भी इस आयु के कमोबेश हर एक बच्चे पर होता है. इस अदृश्य लड़ाई में हमारी आने वाली पीढ़ी इतनी दब जाती है के कब वो उम्र से पहले परिपक्व हो जाते हैं पता ही नहीं चलता. इस थकाने वाली प्रक्रिया में खुद को साबित करने और दौड़ में बनाये रखने के लिए सबसे अहम् है आपका स्वस्थ होना. इसके लिए बेशक आप आराम करते हैं, मज़े करते हैं, पार्टियों का हिस्सा भी बनते हैं मगर क्या इन सब क्रियाओं से आपके मन को शांति मिलती है ?

तन और मन की शान्ति बहुत ज्यादा अलग हैं, इसे ऐसे समझें की आपको कोई काम करना है और वह अभी तक अधुरा है तो फिर आप सोते समय भी इस उधेड़बुन में रहेगे की इस काम को कैसे जल्दी से जल्दी पूरा किया जाये . बेशक आपका शरीर आराम कर रहा है मगर आपके मन को अभी भी आराम की आवश्यकता है. ऐसा अक्सर सभी के साथ होता है और ऐसा होना हमारे हाथ में भी नहीं होता क्योंकि हम सभी आपस में जुड़े हैं और एक दुसरे के कर्तव्यों और कार्यो से सीधे ही प्रभावित होते हैं. और इस रास्ते आपको चाहे अनचाहे दिमागी कसरत से खुद के कारण या जाने अनजाने लोगों के कारण दो चार होना ही पड़ता है.

इन सभी विषम परिस्थितिओं के कारण ही कहा जाता है की हमारा तन तो आराम करता है मगर मन को आराम नहीं मिल पाता या मिलता भी है तो बहुत सीमित. इसलिए ही हमारे बुजुर्ग कहते हैं की आदमी को नींद अच्छी लेनी चाहिए मगर यह भी संभव नहीं होता क्योंकि बिस्तर तक जाना हमारे हाथ होता है और नींद आना या ना आना बड़े से बड़े सुरमा के हाथ में भी नहीं होता.

फिर मन को कैसे विश्राम दिया जाये ? ये गहन चिंता का विषय हो सकता है , आप भी विचार करके देखिये.

मेरे कुछ सुझाव और अपनी समझ इस विषय पर कुछ साधारण सी बनी है आप भी प्रकाश डाल सकते हैं की मैं कहा तक सही हु और क्या सुझाव आप अलग से दे सकते हैं – 

मन को शांत रखने के 20 तरीके (man ko shant rakhne ke 20 tarike)

1. जिस काम से सीधा सीधा हमारा अहित न जुड़ा हो तो कोशिश करें की ऐसे चीजों से दूर रहे बशर्ते की उस समस्या या घटना से दूर रहने के लिए हमारी अंतरात्मा को कोई ऐतराज़ न हो

2. बिना कोई कारण और आवश्यकता के दूसरों के काम में टांग न अड़ाएं तो बहुत बेहतर होगा

3. स्वयं को हमेशा श्रेष्ठ समझने और साबित करने से बचें

4. बिना मांगे सलाह और समझाईस ना दे और ना ही लें

5. आप जैसे हैं और जिस स्थिति में हैं उसको स्वीकार करें और वैसा ही व्यवहार करें

6. मन को प्रसन्न रखने का कोई भी मौका ना छोड़ें

7. घर के या आसपास के बुजुर्गों से ज़रूर बात करें और उनके नज़रिए को समझें बेशक वो जीवन के मामले में आपसे ज्यादा तजुर्बेकार हैं

8. बच्चों के साथ भी ज़रूर समय बिताएं इससे आत्मिक संतुष्टि मिलती है

10. जीवन साथी को भी ज़रूर कुछ पल के लिए दुनियादारी को भुलाकर समय दें जिसमे भावनात्मक और प्रेमपूर्ण बातें करें

11. यदि पुस्तकों का शौक हो तो ऐसी पुस्तकें पढ़ें जो आपको थोड़े समय के लिए ही सही पर इस दुनिया से दूर ले जाये और आप शांति की अनुभूति कर सकें

12. गाने सुनें और गुनगुनाएं. गाने ऐसे हों जो शांति दे न की बहुत शोर शराबे और तड़क भड़क वाले हों

13. सुबह और शाम कम से कम 5-5 मिनट के लिए आँखें बंद करके शांत चित्त से बैठें और अपने आप को अपनी समस्याओं से थोड़े समय के लिए अलग कर लेवें.

14. हर दिन के लिए अपनी क्षमताओं के अनुरूप कार्य करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें और उतना ही करें जितना आपका अपना सामर्थ्य है

15. अपने रूचि के काम करें या जो काम आप करते हैं उसमे रूचि जगाएं नहीं तो जो भी काम आप कर रहे हो वो आपको सिर्फ बोझ ही लगेगा

16. ज्यादा से ज्यादा मित्र बनाएं और समय समय पर उनसे मिलते रहें या बातें करते रहें

17. अपनी समस्याओं, उलझनों और मन की स्थिति को साझा करते रहें. इस प्रकार मन को हल्का रखें

18. कभी भी मन विचलित होने पर या बुरे ख्याल आने पर मन को शांत करने के उपाय करें या किसी से बात करें

19. हर एक करीबी व्यक्ति को सब बात बताने की आवश्यकता नहीं है मगर हर एक बात अलग अलग से शेयर ज़रूर करें जैसे किसी से अपने काम की बातें साझा करें तो किसी और से भावनात्मक बाते साझा करें तो किसी अन्य से पारिवारिक चीज़े साझा कर सकते है ताकि जब आपको सहयोग की आवश्यकता हो तो आपके पास ज्यादा विकल्प मौजूद हों

20. स्वस्थ तन में स्वस्थ मन का वाश होता है इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने का भरपूर प्रयास करें और पर्याप्त मात्रा में पानी ज़रूर पियें.

उपरोक्त तरीकों से हम मन को विश्राम दे सकते है और ज्यादा थकने से बचा सकते हैं. वर्तमान में मन शांत करने का सबसे बढ़िया विकल्प है मैडिटेशन जो की हर आयु वर्ग और प्रत्येक व्यक्ति के लिए अत्यंत लाभकारी तरीका है और बहुत ही किफायती भी है. इसके द्वारा हम स्वयं को अध्यात्म की ओर ले जाने में सफल हो सकते हैं और स्वयं को पहचानने में खुद की सहायता कर सकते हैं.

दोस्तों आज के लिए बस इतना आगे और अन्य बिन्दुओं पर चर्चा करेंगे....आज का यह विषय और इस पर मेरी राय कैसी लगी कमेंट करके ज़रूर बताइयेगा. धन्यवाद .... सबका शुभ हो

(मन को शांत रखने के 20 तरीके man ko shant rakhne ke 20 tarike)

valuable life mantra

क्या मेहनत करना काफी है ? Is Hard work enough to achieve anything?

 क्या मेहनत करना काफी है ?  (Is Hard work enough to achieve anything?) वैसे तो सभी प्रकार का कार्य पूजनीय है और पूरी दुनिया के लोग अलग अलग क...